मंगलाचरण 

- मैथिलीशरण गुप्त


राम तुम्हारे इसी धाम में नाम-रूप-गुण लीला लाभ;
इसी देश में हमें जन्म दो, लो प्रणाम हे नीरजनाभ।
धन्य हमारा भूमि-भार भी, जिससे तुम अवतार धरो;
भुक्ति-मुक्ति मांगें क्या तुमसे, हमें भक्ति दो, ओ अमिताभ।